Spiritual Dohas on Kashi Vishwanath | Divine Poetry on Lord Shiva

काशी विश्वनाथ के दोहे | शिव-तत्त्व

🕉️ काशी विश्वनाथ – शिव-तत्त्व के दोहे 🕉️

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महाश्मशान काशी सदा, शिव का अनुपम धाम।
मृत्यु भी पाती मुक्ति यहाँ, मिटता जन्म का भ्राम॥
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भस्म लिपट तन ज्योति-घन, जटा जूट में गंग।
विश्वनाथ के ध्यान से, कटें कर्म के संग॥
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काल भी थर-थर काँपता, जहाँ शिव करें निवास।
अनहद नाद सुनाइ दे, हर ले भव का त्रास॥
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तीसरा नेत्र खुला जहाँ, प्रगटे परम प्रकाश।
अज्ञान तम हरता सदा, विश्वेश्वर का आभास॥
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नागरूप भूषण धरे, चंद्र ललाट सुहाय।
त्याग-वैराग्य की मूर्ति हैं, शिव ही सत्य उपाय॥
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घाट-घाट पर गूंजता, हर-हर महादेव।
काशी में जो रम गया, सो पावे शिव-सेव॥
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हर हर महादेव • काशी विश्वनाथ की जय
Illustration of Kashi Vishwanath temple representing Lord Shiva, spirituality, liberation, sacred Ganga, and timeless devotion.
Kashi Vishwanath – the eternal city where Shiva liberates the soul

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