श्मशान का रहस्य: जहाँ मृत्यु नहीं, मुक्ति का द्वार खुलता है

 

मृत्यु के बीच जीवन का चमत्कार:

 जब श्मशान में प्रकट हुई शिव की अनंत कृपा

काशी के रहस्यमय श्मशान में दिव्य प्रकाश से आलोकित शिशु, जिसकी रक्षा एक काला नाग कर रहा है, शिव कृपा का प्रतीकात्मक दृश्य।

श्मशान के अंधकार में भी शिव की कृपा जीवन और मुक्ति का प्रकाश बनकर प्रकट होती है।


- डॉ संजय कुमार पवार

भूमिका: क्या मृत्यु वास्तव में अंत है?

आज का मनुष्य भय, तनाव, अकेलेपन और निराशा से जूझ रहा है। छोटी-सी असफलता भी उसे जीवन से विमुख कर देती है। ऐसे समय में एक प्रश्न बार-बार उठता है—क्या जीवन केवल जन्म और मृत्यु के बीच की यात्रा है, या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य भी छिपा है?

सनातन परंपरा हमें बताती है कि जहाँ संसार अंत देखता है, वहाँ ईश्वर आरंभ देखते हैं। जिस श्मशान को लोग भय और विनाश का प्रतीक मानते हैं, वही स्थान कभी-कभी दिव्य कृपा और मुक्ति का द्वार बन जाता है। मृत्यु के अंधकार में भी जीवन का प्रकाश छिपा होता है और यही शिव का सबसे बड़ा संदेश है।


श्मशान और शिव: एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य

शास्त्रीय आधार

भगवान शिव को "श्मशानवासी" कहा गया है। वे कैलाश के स्वामी हैं, परंतु उनका निवास श्मशान में भी बताया गया है।

शिवपुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव उन स्थानों पर भी उपस्थित रहते हैं जहाँ संसार जाना नहीं चाहता। श्मशान उनके लिए भय का स्थान नहीं, बल्कि वैराग्य और सत्य का प्रतीक है।

प्रसिद्ध मंत्र

"ॐ नमः शिवाय"

यह पंचाक्षरी मंत्र जीव को अहंकार, भय और मोह से मुक्त करने वाला माना गया है।


सरल अर्थ और व्याख्या

श्मशान हमें तीन महत्वपूर्ण सत्य सिखाता है—

  • शरीर नश्वर है।
  • आत्मा अमर है।
  • ईश्वर ही अंतिम सत्य हैं।

जिसे हम जीवन का अंत मानते हैं, वह वास्तव में एक नई यात्रा का प्रारंभ हो सकता है।

शिव इसलिए श्मशान में विराजते हैं क्योंकि वहाँ मनुष्य का अहंकार समाप्त हो जाता है। धन, पद, प्रतिष्ठा और अभिमान सब वहीं छूट जाते हैं।


कठिन शब्दों का सरल अर्थ

कठिन शब्द सरल अर्थ
अनुकंपा ईश्वर की कृपा
अनुग्रह विशेष आशीर्वाद
ईश्वरांश ईश्वर का अंश
मुक्ति जन्म-मरण के चक्र से स्वतंत्रता
वैराग्य संसार के मोह से ऊपर उठना

जब मृत्यु के बीच जीवन मुस्कुराता है

कभी-कभी ईश्वर अपनी कृपा ऐसे रूप में देते हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

एक श्मशान भूमि में, जहाँ चारों ओर मृत्यु का वातावरण था, वहाँ अचानक जीवन की एक नई किरण प्रकट हुई। निराशा से भरा हृदय उस दिव्य उपहार को देखकर आशा से भर उठा।

जिस स्थान को लोग विनाश का प्रतीक समझते थे, वही स्थान करुणा, मातृत्व और जीवन का केंद्र बन गया।

उस क्षण ऐसा अनुभव हुआ मानो स्वयं भगवान ने मृत्यु के अंधकार में जीवन की श्वास भर दी हो।

यही शिव की लीला है।

वे कभी-कभी हमें सबसे कठिन परिस्थितियों में सबसे बड़ा उपहार देते हैं।


प्रेरणादायक धार्मिक प्रसंग

मार्कण्डेय ऋषि की कथा

प्राचीन काल में मार्कण्डेय नामक बालक की आयु केवल सोलह वर्ष निर्धारित थी।

जब मृत्यु का समय निकट आया तो उसने भगवान शिव की आराधना प्रारंभ कर दी।

यमराज उसे लेने आए, परंतु बालक शिवलिंग से लिपटकर "ॐ नमः शिवाय" का जप करता रहा।

भक्त की पुकार सुनकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और यमराज को रोक दिया।

मार्कण्डेय को दीर्घायु का वरदान प्राप्त हुआ।

शिक्षा

  • मृत्यु से बड़ा ईश्वर है।
  • भय से बड़ी भक्ति है।
  • अंत दिखाई देने पर भी शिव नई शुरुआत कर सकते हैं।

वर्तमान जीवन में इस संदेश का महत्व

1. तनाव कम करता है

जब हम समझते हैं कि सब कुछ ईश्वर की योजना का भाग है, तब मानसिक दबाव कम होने लगता है।

2. भय दूर करता है

मृत्यु का भय अधिकांश भय का मूल है। शिव का चिंतन इस भय को कमजोर करता है।

3. असफलता में शक्ति देता है

कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी असफलता ही नए अवसरों का द्वार बनती है।

4. मानसिक शांति प्रदान करता है

"ॐ नमः शिवाय" का नियमित जप मन को स्थिर बनाता है।

5. आत्मविश्वास बढ़ाता है

जब व्यक्ति अनुभव करता है कि ईश्वर उसके साथ हैं, तब उसका आत्मबल कई गुना बढ़ जाता है।


शिव कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय

प्रतिदिन करें

  • सुबह 108 बार "ॐ नमः शिवाय" का जप।
  • सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
  • किसी जरूरतमंद की सहायता करें।
  • मृत्यु और जीवन दोनों को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार करने का अभ्यास करें।

ध्यान साधना

प्रतिदिन 5 मिनट आँखें बंद कर भगवान शिव के शांत स्वरूप का ध्यान करें।

यह अभ्यास मन में स्थिरता और निर्भयता विकसित करता है।


निष्कर्ष

जीवन का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि जहाँ संसार अंत देखता है, वहाँ ईश्वर आरंभ देख रहे होते हैं।

श्मशान केवल मृत्यु का स्थान नहीं, बल्कि सत्य का विद्यालय है। भगवान शिव हमें सिखाते हैं कि हर अंधकार के पीछे प्रकाश छिपा है, हर पीड़ा के पीछे कृपा और हर अंत के पीछे एक नई शुरुआत।

यदि आज जीवन में निराशा है, तो याद रखिए—ईश्वर की कृपा किसी भी क्षण आपकी परिस्थितियों को बदल सकती है।

अपने भीतर झाँकिए, शिव का स्मरण कीजिए और विश्वास रखिए कि जीवन की हर घटना आपको किसी उच्चतर सत्य की ओर ले जा रही है।

हर हर महादेव।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. भगवान शिव श्मशान में क्यों रहते हैं?

श्मशान वैराग्य, सत्य और नश्वरता का प्रतीक है। शिव हमें बताते हैं कि शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है।

2. क्या श्मशान को आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है?

हाँ। अनेक तांत्रिक और शैव परंपराओं में श्मशान को साधना और आत्मबोध का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है।

3. मृत्यु के भय को कैसे दूर करें?

नियमित शिव मंत्र जप, ध्यान और आत्मा की अमरता पर चिंतन मृत्यु के भय को कम करने में सहायक होता है।

4. "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का क्या महत्व है?

यह मंत्र मन को शुद्ध करता है, भय कम करता है और शिव चेतना से जुड़ने का माध्यम माना जाता है।

5. कठिन समय में भगवान शिव की कृपा कैसे प्राप्त करें?

श्रद्धा, नियमित जप, सेवा, संयम और सच्चे मन से की गई प्रार्थना शिव कृपा प्राप्त करने के प्रमुख साधन हैं।

6. क्या असफलता भी ईश्वर की योजना का भाग हो सकती है?

सनातन दृष्टिकोण के अनुसार कई बार असफलता भविष्य की बड़ी सफलता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग बनती है।

7. जीवन और मृत्यु का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संदेश क्या है?

जीवन और मृत्यु दोनों परिवर्तन के चरण हैं। आत्मा शाश्वत है और ईश्वर ही अंतिम सत्य हैं। 

क्या वास्तव में मृत्यु अंत है? श्मशान से मिलने वाला अद्भुत आध्यात्मिक संदेश

जब भी हम "श्मशान" शब्द सुनते हैं, हमारे मन में भय, दुःख, विरक्ति और मृत्यु की छवि उभर आती है। अधिकांश लोग श्मशान को जीवन का अंतिम पड़ाव मानते हैं। वहाँ जाने की कल्पना मात्र से मन असहज हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव ने अपने निवास के लिए श्मशान को ही क्यों चुना?

यदि श्मशान केवल दुःख और विनाश का स्थान होता, तो देवों के देव महादेव वहाँ क्यों विराजते?

सनातन धर्म का दृष्टिकोण हमें एक अद्भुत सत्य सिखाता है। जिस स्थान को संसार अंत समझता है, वही स्थान ईश्वर की दृष्टि में एक नई शुरुआत का द्वार है। श्मशान केवल शरीर का अंत नहीं है, बल्कि आत्मा की यात्रा के अगले चरण का प्रवेश द्वार भी है।

यह विषय आज के समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आधुनिक जीवन में मनुष्य भय, तनाव, असफलता, अकेलेपन और निराशा से घिरता जा रहा है। कई बार परिस्थितियाँ इतनी कठिन हो जाती हैं कि व्यक्ति जीवन का अर्थ ही भूल जाता है। ऐसे समय में श्मशान और शिव का आध्यात्मिक संदेश हमें जीवन को एक नई दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।


श्मशान को शिव का प्रिय स्थान 

क्यों कहा गया है?

सनातन परंपरा में भगवान शिव को "श्मशानवासी" कहा गया है। यह कोई सामान्य बात नहीं है।

दूसरे देवता जहाँ स्वर्ग, महलों या दिव्य लोकों में निवास करते हैं, वहीं महादेव श्मशान में विराजते हैं। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा हुआ है।

श्मशान वह स्थान है जहाँ मनुष्य का अहंकार समाप्त हो जाता है।

वहाँ न कोई राजा होता है, न कोई गरीब।

न कोई बड़ा होता है, न छोटा।

न कोई धनवान होता है, न निर्धन।

सब कुछ एक समान हो जाता है।

जो व्यक्ति जीवन भर अपने धन, पद, प्रतिष्ठा और अहंकार पर गर्व करता है, वह भी अंततः उसी श्मशान की मिट्टी में विलीन हो जाता है।

यही कारण है कि शिव उस स्थान को अपना निवास बनाते हैं जहाँ मनुष्य को जीवन का सबसे बड़ा सत्य दिखाई देता है।


शास्त्रीय आधार: शिव और श्मशान का संबंध

शिवपुराण तथा अनेक तांत्रिक ग्रंथों में श्मशान को अत्यंत पवित्र स्थान बताया गया है।

एक प्रसिद्ध श्लोक है—

"नमः शिवाय शान्ताय कारणत्रय हेतवे।"

अर्थात् भगवान शिव उन सभी कारणों के मूल हैं जो सृष्टि, पालन और संहार का संचालन करते हैं।

शिव केवल संहार के देव नहीं हैं।

वे परिवर्तन के देव हैं।

संहार का अर्थ विनाश नहीं होता।

संहार का अर्थ है—

पुराने का समाप्त होकर नए का जन्म लेना।

जैसे बीज मिट्टी में विलीन होता है और फिर वृक्ष बनकर जन्म लेता है।

वैसे ही मृत्यु भी एक परिवर्तन है, अंत नहीं।


मृत्यु का वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ

आमतौर पर लोग मृत्यु को सबसे बड़ा दुःख मानते हैं।

लेकिन शास्त्रों में मृत्यु को एक द्वार कहा गया है।

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—

"न जायते म्रियते वा कदाचित्।"

अर्थात आत्मा न जन्म लेती है और न मरती है।

मरता केवल शरीर है।

आत्मा तो शाश्वत है।

जब यह सत्य समझ में आता है, तब मृत्यु का भय धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।

समस्या यह है कि हम स्वयं को शरीर मान लेते हैं।

जबकि सनातन धर्म हमें सिखाता है कि हम शरीर नहीं, बल्कि आत्मा हैं।

श्मशान इसी सत्य का प्रत्यक्ष विद्यालय है।


श्मशान: भय का नहीं, वैराग्य का स्थान

अधिकांश लोग श्मशान को देखकर डर जाते हैं।

लेकिन संतों और योगियों ने श्मशान को साधना का स्थान माना है।

क्यों?

क्योंकि वहाँ संसार का मोह कमज़ोर पड़ जाता है।

जब व्यक्ति देखता है कि एक दिन सब कुछ यहीं छूट जाएगा, तब उसके भीतर वैराग्य जागता है।

वैराग्य का अर्थ संसार छोड़ना नहीं है।

वैराग्य का अर्थ है—

संसार में रहते हुए भी उसके मोह में न फँसना।

अपने कर्तव्यों को निभाना, लेकिन अहंकार से मुक्त रहना।

यही शिव का मार्ग है।


एक प्रेरणादायक आध्यात्मिक कथा

एक बार एक व्यक्ति जीवन से पूरी तरह निराश हो गया।

उसका व्यापार नष्ट हो गया था।

परिवार में समस्याएँ थीं।

मित्रों ने साथ छोड़ दिया था।

वह सोचने लगा कि अब जीवन में कुछ शेष नहीं बचा।

एक रात वह अत्यंत दुःखी मन से नदी किनारे स्थित श्मशान की ओर चला गया।

वहाँ एक वृद्ध साधु ध्यान में बैठे थे।

व्यक्ति ने उनसे पूछा—

"क्या जीवन का कोई अर्थ है?"

साधु मुस्कुराए और बोले—

"चारों ओर देखो।"

व्यक्ति ने देखा कि चिताएँ जल रही थीं।

साधु बोले—

"इनमें से प्रत्येक व्यक्ति ने कभी सोचा होगा कि उसके बिना संसार नहीं चलेगा। लेकिन आज संसार चल रहा है।"

फिर साधु ने कहा—

"जिस चीज़ को तुम अपना समझ रहे हो, वह कभी तुम्हारी थी ही नहीं।"

"और जो वास्तव में तुम्हारा है, उसे कोई छीन नहीं सकता।"

व्यक्ति ने पूछा—

"वह क्या है?"

साधु ने उत्तर दिया—

"तुम्हारी आत्मा और ईश्वर से तुम्हारा संबंध।"

उस रात के बाद उस व्यक्ति का जीवन बदल गया।

उसने परिस्थितियों को बदलने से पहले अपनी दृष्टि बदल ली।

और यही उसके जीवन की सबसे बड़ी जीत बन गई।


शिव की कृपा कैसे काम करती है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि ईश्वर की कृपा केवल सुख के रूप में आती है।

लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता।

कभी-कभी ईश्वर हमारी गलत धारणाओं को तोड़ने के लिए कठिन परिस्थितियाँ भी भेजते हैं।

कई बार जिस घटना को हम दुर्भाग्य समझते हैं, वही भविष्य में सबसे बड़ा वरदान सिद्ध होती है।

शिव की कृपा का स्वरूप अद्भुत है।

वे पहले अहंकार को तोड़ते हैं।

फिर ज्ञान देते हैं।

फिर आत्मबल देते हैं।

और अंत में मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं।


वर्तमान जीवन में श्मशान का संदेश क्यों 

आवश्यक है?

आज की दुनिया पहले से अधिक सुविधाजनक है।

लेकिन मानसिक शांति पहले से कम है।

लोगों के पास साधन हैं, लेकिन संतोष नहीं।

धन है, लेकिन सुरक्षा का भाव नहीं।

सफलता है, लेकिन आनंद नहीं।

ऐसे समय में श्मशान का संदेश हमें जीवन की प्राथमिकताएँ समझाता है।


1. तनाव कम करने में सहायता

जब हम समझते हैं कि जीवन अस्थायी है, तब छोटी-छोटी बातों का तनाव कम होने लगता है।

हम हर समस्या को जीवन-मरण का प्रश्न बनाना छोड़ देते हैं।


2. असफलता का भय दूर करता है

श्मशान हमें सिखाता है कि अंततः सब कुछ नश्वर है।

इसलिए असफलता भी स्थायी नहीं है।

आज की हार कल की सफलता का आधार बन सकती है।


3. मानसिक शांति प्रदान करता है

जो व्यक्ति मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता है, उसके भीतर एक अद्भुत शांति उत्पन्न होती है।

वह वर्तमान में जीना सीख जाता है।


4. आत्मविश्वास बढ़ाता है

जब व्यक्ति समझता है कि उसकी वास्तविक पहचान आत्मा है, तब बाहरी परिस्थितियाँ उसे आसानी से नहीं तोड़ पातीं।


5. संबंधों को बेहतर बनाता है

श्मशान का संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन सीमित है।

इसलिए द्वेष, ईर्ष्या और क्रोध में समय नष्ट करने का कोई लाभ नहीं।


शिव साधना के सरल उपाय

यदि आप जीवन में शांति, साहस और सकारात्मकता चाहते हैं, तो ये सरल साधनाएँ कर सकते हैं।

प्रतिदिन जप करें

ॐ नमः शिवाय

कम से कम 108 बार जप करें।


सोमवार का व्रत

सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें।


मौन ध्यान

प्रतिदिन 10 मिनट मौन बैठें।

अपने श्वास पर ध्यान दें।


सेवा करें

किसी ज़रूरतमंद की सहायता करें।

शिव की कृपा केवल मंदिरों में नहीं, सेवा में भी प्राप्त होती है।


क्या मृत्यु वास्तव में मंगलमय हो सकती है?

यह प्रश्न सुनने में विचित्र लग सकता है।

लेकिन संतों ने मृत्यु को भय नहीं, बल्कि एक परिवर्तन माना है।

यदि जीवन धर्म, सत्य और ईश्वर स्मरण में व्यतीत हो, तो मृत्यु भी भयावह नहीं रहती।

काशी की परंपरा में कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों को मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं।

इसलिए वहाँ मृत्यु को भी एक दिव्य अवसर माना गया है।

यह विचार हमें मृत्यु से प्रेम करना नहीं सिखाता।

यह हमें मृत्यु से डरना छोड़ना सिखाता है।


काशी और मुक्ति का रहस्य

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है।

मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं।

काशी केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है।

यह एक आध्यात्मिक चेतना है।

काशी का अर्थ है—

अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का प्रकाश।

जब मनुष्य के भीतर ज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है, तभी वास्तविक काशी का अनुभव होता है।


जीवन का सबसे बड़ा सत्य

हम जीवन भर बहुत कुछ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

धन।

प्रतिष्ठा।

संपत्ति।

संबंध।

लेकिन अंततः हमें यह समझना पड़ता है कि इनमें से कुछ भी स्थायी नहीं है।

स्थायी केवल तीन चीजें हैं—

  • आत्मा
  • कर्म
  • ईश्वर

जो व्यक्ति यह समझ लेता है, उसका जीवन बदल जाता है।


निष्कर्ष: जहाँ संसार अंत देखता है, वहाँ शिव 

आरंभ देखते हैं

श्मशान का संदेश भय का नहीं, जागृति का संदेश है।

यह हमें याद दिलाता है कि जीवन बहुत मूल्यवान है।

हर दिन ईश्वर का उपहार है।

हर साँस एक अवसर है।

हर कठिनाई एक शिक्षा है।

और हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत है।

यदि आज आपके जीवन में अंधकार है, तो निराश मत होइए।

महादेव की कृपा किसी भी क्षण आपके जीवन में नया प्रकाश ला सकती है।

अपने भीतर झाँकिए।

अहंकार को छोड़िए।

ईश्वर पर विश्वास रखिए।

और याद रखिए—

जिस स्थान को संसार मृत्यु का साम्राज्य कहता है, वही स्थान कभी-कभी मुक्ति और दिव्य कृपा का द्वार बन जाता है।

हर हर महादेव!



Internal Links

  1. भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ

  2. ॐ नमः शिवाय मंत्र का महत्व और लाभ

  3. काशी विश्वनाथ मंदिर का आध्यात्मिक इतिहास

  4. मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा क्या है?

  5. मार्कण्डेय ऋषि की प्रेरणादायक कथा

  6. शिवपुराण में वर्णित मुक्ति का रहस्य

  7. वैराग्य क्या है और इसे कैसे अपनाएँ?

  8. महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

  9. शिव ध्यान की सरल विधि

  10. कालभैरव और काशी का रहस्य

श्मशान, शिव और मुक्ति पर दोहे | हर हर महादेव
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श्मशान, शिव और मुक्ति पर दोहे

कबीर-प्रेरित वैराग्य, आत्मज्ञान और शिवभक्ति की मौलिक वाणी
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दोहा १
श्मशानन भीतर देखिए, जग का झूठा मान।
राजा रंक समाय सब, मिटि जाता अभिमान॥
दोहा २
जिसको जग अँधियार कहे, ताहि बसे भगवान।
मृत्यु-द्वार पर खोलते, शिव जीवन के ज्ञान॥
दोहा ३
जलती चिता पुकारती, सुन रे मन अज्ञान।
जो आया सो जाएगा, यही जगत विधान॥
दोहा ४
तन माटी का पात्र है, साँसें थोड़ी मेहमान।
आतम ज्योति अमर रहे, यही साँच पहचान॥
दोहा ५
काशी केवल नगर नहीं, भीतर का प्रकाश।
जिसके मन शिव जागते, मिट जाता सब त्रास॥
दोहा ६
मोह-महल सब ढह गए, छूटा झूठा नेह।
नाम शिवा का साथ दे, अंत समय भी सेह॥
दोहा ७
दुःख को जिसने शाप समझ, रोता दिन औ रात।
शिव की दृष्टि में वही, बनता कृपा प्रभात॥
दोहा ८
मृत्यु नहीं संहार है, बदले केवल भेष।
आतम पंछी उड़ चला, छोड़ पुराना वेश॥
दोहा ९
श्मशानन की राख में, छिपा अमर संदेश।
जो खुद को पहचान ले, उसका कटे क्लेश॥
दोहा १०
काल खड़ा हर द्वार पर, कौन करे अभिमान।
साँस-साँस में शिव बसें, यही सच्चा धनवान॥
दोहा ११
धन-दौलत संग ना चले, ना चल पावे मान।
कर्म और हरिनाम ही, जाएँ तेरे साथ॥
दोहा १२
माटी ऊपर माटी धरे, कैसा तेरा गर्व।
एक झकोरा काल का, कर दे जीवन सर्व॥
दोहा १३
शिव श्मशानन में मिले, यह अद्भुत उपदेश।
जहाँ मिटे ‘मैं’ का भ्रम, वहीं प्रकटे विशेष॥
दोहा १४
जीवन भर जो जोड़ता, जग की झूठी थात।
अंत समय खाली चला, छूटे सब सौगात॥
दोहा १५
भय का कारण मृत्यु नहीं, अज्ञानन की रीत।
आतम को जो जान ले, उसके मन में प्रीत॥
दोहा १६
राख बनी पहचान सब, मिटा नाम औ रूप।
शिव चरणन में जो झुके, वही हुआ अनूप॥
दोहा १७
साँस मिली तो नाम ले, मत कर काल प्रतीक्ष।
कब गिर जाए देह यह, किसने पाई दीक्ष॥
दोहा १८
शिव का डमरू बोलता, सुन मन मेरे भाई।
जन्म-मरण दो तीर हैं, नाव एक हरिनाम॥
दोहा १९
वैरागी वह नहीं जिसे, छोड़ दिया परिवार।
मोह छोड़ जो कर्म करे, वही संत विचार॥
दोहा २०
चिता जली तो दिख गया, जीवन का आकार।
क्षणभंगुर संसार है, शाश्वत केवल सार॥
दोहा २१
काया कंचन सी लगे, भीतर क्षण का वास।
काल करै जब स्पर्श तो, रह जाए बस राख॥
दोहा २२
काशी मन के बीच है, खोजे जग अजान।
ज्ञान दीप जब जल उठे, मिल जाए भगवान॥
दोहा २३
अंत समय ना पूछिए, कौन बड़ा कौन छोट।
राख बराबर कर गई, राजा रंक की ओट॥
दोहा २४
दुःख आया तो जान ले, शिव का कोई भेद।
पत्थर को भी घिस-घिसे, तब बनता है खेद॥
दोहा २५
श्मशानन की नीरवता, कहती बारंबार।
जो भीतर उतरा नहीं, उसका जीवन हार॥
दोहा २६
मुक्ति माँगने से नहीं, होती केवल प्राप्त।
अहंकार जब मर गया, तभी खुला वह द्वार॥
दोहा २७
जीवन इक सराय है, मत समझो घर-बार।
आया यात्री चार दिन, फिर करना प्रस्थान॥
दोहा २८
नाम शिवा का दीप धर, मन मंदिर के माहिं।
अंधियारा सब मिट गया, जब से बसे सियाहिं॥
दोहा २९
मृत्यु नहीं दुश्मन कभी, वह तो ईश दूत।
जग के बंधन काटकर, ले जाए निज मूल॥
दोहा ३०
कहे संत यह बात रे, सुन ले मन निष्काम।
श्मशानन से सीख ले, शिव ही अंतिम धाम॥
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